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पाठ्यक्रम

एफ़डीपी में प्रमुखतः प्रबंधन शिक्षकों के अध्यापन, प्रशिक्षण व अनुसंधान कौशलों का उन्नयन करने पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाता है, जिन्होंने शिक्षण व अनुसंधान तरीकों में अद्यतन विकास के साथ अपने आपको परिचित कराने का मौका नहीं पाया है। इसी तरह से सामान्य प्रबंधन शिक्षण में भी क्षमता विकसित करने के लिए यह कार्यक्रम प्रतिभागी को समर्थ बनाता है। भा.प्र.सं.अ. में प्रतिभागियों द्वारा 15 सप्ताह व्यतीत करने के दौरान, वे अनुशासन-आधारित एक पाठ्यक्रम के सेट का अध्ययन करते हैं जिनमें रणनीति निर्माण एवं कार्यान्वयन, कानूनी परिवेश, प्रबंधन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी, आर्थिक पर्यावरण एवं नीति, प्रबंधन लेखाविधि, वित्तीय प्रबंधन, विपणन, संगठनात्मक व्यवहार की समझ, मानव संसाधन प्रबंधन, डेटा विश्लेषण के लिए साँख्यिकी, संचालन प्रबंधन और राजस्व प्रबंधन आदि शामिल हैं। इस मोड्यूल का उद्देश्य प्रबंधकीय परिप्रेक्ष्य का विकास करना है। 

पाठ्यक्रम के दूसरे सेट में विशिष्ट अध्यापन संबंधी और अनुसंधान कौशलों पर ध्यान दिया गया है। इसमें प्रबंधन शिक्षकों के लिए संचार, प्रबंधन शिक्षकों के लिए शैक्षणिक लेखन, अनुसंधान पद्धति, डेटा विश्लेषण के लिए अनुप्रयोग और प्रबंधन शिक्षण में मामला विधि शामिल हैं।  
 
इसके अलावा, प्रतिभागी कुछ ऐच्छिकों का विकल्प ले सकते हैं। 33वें एफ़डीपी में ऐच्छिकों की एक श्रृंखला राजस्व प्रबंधन, स्वास्थ्य एवं अस्पताल प्रबंधन, विपणन अनुसंधान, ज्ञान प्रबंधन और अंतरराष्ट्रिय व्यवसाय सहित पेश की गई थी।


प्रतिभागी दो-चार क्षेत्रीय दौरे भी कर पाएंगे। इस कार्यक्रम की एक विशेष सुविधा है मामला लेखन कार्यशाला जिसमें कार्यक्रम के अंत तक प्रतिभागी द्वारा पूर्ण होने वाले मामलों का एक सेट रहता है। प्रतिभागियों को विश्व स्तर के पुस्तकालय का भी विस्तार से लाभ मिलेगा, जो कि भा.प्र.सं.अ. पेश करता है।