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अहमदाबाद के बारे में

पृष्ठभूमि

अंग्रेजों के आगमन और मद्रास एवं कलकत्ता प्रेसीडेंसी की स्थापना से पहले उपमहाद्वीप के भीतर क्षेत्रफल की दृष्टि से अहमदाबाद सबसे बड़ा शहर था।
 
11 वीं सदी के आरंभ से 14 वीं सदी तक

लगभग11वीं सदी में अहमदाबाद के आसपास के क्षेत्र पर एक भील राजा का शासन था और आशापल्ली या आशावल के रूप में जाना जाता था। पाटन के सोलंकी शासक, करणदेव-1ने युद्ध में भील राजा को हरा दिया और कर्णावती राज्य की स्थापना की जिसे आज मणिनगर के रूप में जाना जाता है। सोलंकी शासन 13 वीं सदी तक रहा, जिसके बाद राज्य धोलका के वाघेला राजवंश के हाथों में आ गया। तेरहवीं शताब्दी के अंत में, पूरे गुजरात पर दिल्ली सल्तनत द्वारा कब्जा कर लिया गया और मुजफ्फरीद राजवंश ने यहाँ शासन किया।
 
गांधी आश्रम

साबरमती नदी के किनारे पर स्थित गांधी आश्रम, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए शक्ति केंद्र था। छायादार पेड़ों वाला सुंदर आश्रम परिसर शहर के कोलाहल से शरण प्रदान करता है। आश्रम परिसर के अंदर एक संग्रहालय है। महात्मा गांधी के जीवनकाल के दौरान यह सत्याग्रह आश्रम के रूप में जाना जाता था। दक्षिण अफ्रीका से महात्मा गांधी की वापसी के बाद, उन्होंने अहमदाबाद में बसने का फैसला किया था। महात्मा गांधी को लोग प्यार से बापू कहते थे और वे1917 से 1930 तक यहां रहे थे। यह साबरमती नदी के तट पर एक शांतिपूर्ण,शांत क्षेत्र है जो आज एक राष्ट्रीय स्मारक है ... ..ज्यादा पढें
 
स्वामीनारायण मंदिर कालूपुर

यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है। इसका निर्माण सन् 1822 के आसपास हुआ था। मंदिर में बर्मी टीक से नक्काशी की गई है, और हर मेहराब और टेक को चमकीले रंगों से रंगा गया है, जो स्वामीनारायण मंदिर की एक परिभाषित विशेषता है। खुद भगवान स्वामीनारायण ने श्री नरनारायण देव की मूर्तियाँ यहाँ स्थापित की थी। निकटवर्ती हवेली में, महिलाओं के लिए एक विशेष खंड है, और एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ केवल महिलाओं के लिए समारोह और शिक्षण सत्र आयोजित किए जाते हैं। स्वामीनारायण मंदिर धूसर शहर के बीच में रंगों का छिड़काव है और यह पुराने शहर के पोल में से विरासत यात्रा के लिए प्रारंभ बिंदु भी है ....ज्यादा पढें
 
सिदी सैयद मस्जिद

यह शाही मस्जिद जालीदार पत्थर की अपनी जुड़वां खिड़कियों के लिए विख्यात है,खजूर के पत्तों और घुमावदार प्रतान के साथ पेड़ की शैली में काम किया गया है । यह नाजुक नक्काशी का एक शानदार और अद्वितीय उदाहरण है जो पत्थर को ज़रदोज़ी के काम में बदल देती है। इसका निर्माण अहमद शाह के एक गुलाम, सिदी सैयद द्वारा किया गया था, और इसमें सुंदर नक्काशीदार पत्थर की खिड़कियाँ हैं जिनमें पेड़ की शाखाओं की जटिल गुथाई का चित्रण किया गया है।
 
नल सरोवर

एक काली पूंछ वाला गोडविट मनोहारी रूप से शांत पानी पर उतरता है, अपने पंख फड़फड़ाता है और तैरने लगता है। थोड़ी ऊपर वक्रित चोंच वाला छोटा, भूरा और सफेद बगुला वह पक्षी है जो मध्य यूरोप में अपने बसेरा स्थलों से 3500 किलोमीटर की यात्रा करके गुजरात में नल सरोवर में सर्दियाँ बिताने के लिए आता है! 200 से अधिक प्रकार के पक्षियों के झुंड के झुंड इस झील में उतरते हैं जो अपने बसेरा स्थलों में कड़कड़ाती ठंड से बचने के लिए उतनी ही लंबी यात्रा करते हैं। यहाँ उन्हें भोजन और गर्मी मिलती है। ये प्रवासी पक्षी नल सरोवर में हर साल नवम्बर से फरवरी के दौरान आते हैं....ज्यादा पढें .