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कम्प्यूटर एवं सूचना प्रणाली समूह

 

 कंप्यूटर एवं सूचना प्रणाली समूह (सीआईएसजी) की स्थापना प्रबंधन में कम्प्यूटर अनुप्रयोगों में अनुसंधान की आवश्यकताओं के लिए की गई थी।  जब (1970 में) कंप्यूटरीकरण की शुरुआत का ही माहोल था ऐसे वातावरण में बड़े पैमाने पर संभावित लाभ से अनजानेपन में सीआईएसजी पर काम शुरु किया गया, जिसमें:

प्रबंधन के विभिन्न स्तरों पर संभावित अनुप्रयोगों को पहचानना, और इन अनुप्रयोगों को आयोजित करना और अमल में लाना आदि प्रक्रिया करनी थी।
 

पिछले कुछ वर्षों में, इस गुट ने सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों सहित विभिन्न संगठनों के साथ काम किया है। जबकि गुट का सामान्यतया ध्यान हमेशा प्रबंधन सूचना प्रणाली पर केन्द्रित किया गया है, जिसके विशिष्ट विषयों में काम प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी में बदलते परिदृश्य के आधार पर भिन्न भिन्न रहता है। इस गुट ने निर्णय समर्थन प्रणाली, विशेषज्ञ प्रणाली, कंप्यूटर सहायता प्राप्त अनुदेश, प्रबंधन सूचना प्रणाली, एल्गोरिथ्म डिजाइन, विकास लक्ष्यी सूचना विज्ञान, सॉफ्टवेयर निर्यात, कंप्यूटरऔर नेटवर्क विन्यास के डिजाइन, अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य, और कॉर्पोरेट स्तर के सूचना प्रौद्योगिकी नीति के मुद्दों में अनुसंधान पूर्ण किये हैं।
 
अपनी अनुसंधान और परामर्श गतिविधियों के अलावा, यह समूह संस्थान के सभी प्रमुख कार्यक्रमों सहित स्नातकोत्तर, फैलो, और संकाय विकास कार्यक्रमों के भी पाठ्यक्रमों की पेशकश करता है। स्नातकोत्तर कार्यक्रम में सीआएसजी के द्वारा एक विशेषज्ञता पैकेज- "व्यापार / सिस्टम विश्लेषण" पेश किया जाता है। एफ़पीएम में, यह समूह सूचना प्रणाली स्रोत के लिए जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त, इस समूह के द्वारा प्रति वर्ष मौजूदा हित के विषयों पर कई प्रबंधन विकास कार्यक्रम पेश किये जाते हैं।

कार्य के क्षेत्र

निर्णय समर्थन प्रणाली: संगठनों में डीएसएस निर्माण के प्रयास ही राष्ट्रव्यापी कम्प्यूटर आधारित प्रबंध कार्यक्रम के महत्त्वपूर्ण घटक हैं।

सार्वजनिक प्रशासन: सीआईएसजी के द्वारा सार्वजनिक प्रशासन में असरकारक ग्रामीण विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए कम्प्यूटर के उपयोग को उत्तेजन दिया जा रहा है। यह भारत सरकार के कम्प्यूटरीकरण कार्यक्रम में जिला स्तर पर बड़े पैमाने पर शामिल रहा है।

शिक्षा और प्रशिक्षण: मात्र कार्यक्रम के लिए ही नहीं, अपितु प्रशिक्षण सूचना विश्लेषकों के रूप में भी सीआईएसजी मार्ग निर्माता था। इस प्रयास को पीजीपी के विशिष्टीकरण में भी प्रतिबिंबित करके प्रस्तुत किया गया था।

सोफ्टवेयर और कम्प्युटिंग प्रौद्योगिकी  की गंभीर रूप से आवश्यकता भारत में और अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती जाएगी। 
इस प्राप्ति ने कुछ नये संवेगी क्षेत्र अंकित किये हैं:

  परियोजनाएँ / केन्द्र   

दूरसंचार नीति अध्ययन केन्द्र:  भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद में दूरसंचार नीति अध्ययन केंद्र (सीटीपीएस) की स्थापना भारत में दूरसंचार क्षेत्र में नीति निर्माण और उसके कार्यान्वयन का समर्थन करके अनुसंधान का संचालन करने के लिए किया गया है। गंभीर निरुपक और संरचना और भारत में दूरसंचार क्षेत्र के कामकाज का विश्लेषण करने के उद्देश्य से यह केंद्र नीति अध्ययन को आयोजित करता है।
केंद्र द्वारा नियोजित, पूर्णकालिक सहयोगियों द्वारा जिसे सहायता दी गई थी, ऐसी आईआईएम- संकाय की एक नौ सदस्यीय  टीम परियोजना पर काम कर रही है। यह परियोजना टीम अर्थशास्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी, संचालन प्रबंधन, वित्त, संगठनात्मक व्यवहार, व्यापार नीति, संचालन अनुसंधान जैसे विभिन्न विषयों को शामिल करते हुए अंतः विषयात्मक है। केंद्र के पास निजी क्षेत्र, सरकार और शैक्षिक संस्थानों से वरिष्ठ नीति और निर्णय निर्माताओं से बनी एक सलाहकार समिति है। देश में प्रगतिकर्ता नीति के लिए उपयोगी और प्रासंगिक परियोजनाएँ बनाने के उद्देश्य से परियोजनाओं के लिए समग्र दिशा - निर्देश समीक्षाएँ यह समिति प्रदान करती है।

इलेक्ट्रोनिक वहन केन्द्र भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएम-) में इलेक्ट्रॉनिक वहन केंद्र की स्थापना सार्थक अनुप्रयोगों की पहचान  नौकरशाही और अन्य हितधारकों के बीच  इलेक्ट्रॉनिक वहन अनुप्रयोगों के सफल कार्यान्वयन के ज्ञान और कौशल के प्रसार के दोहरे उद्देश्य के साथ की गई है।  यह केंद्र शैक्षिक संस्थान और उद्योगों के बीच एक सफल भागीदारी का उदाहरण है। हम इस केन्द्र में वास्तविक क्रियान्वयन के दायरे में विकसित "अवधारणा अनुप्रयोगों के सबूत" को आगे बढ़ाने में अन्य भागीदारों की तलाश कर रहे है।

 

सीआईएसजी क्षेत्र में संकाय सदस्य:
प्राथमिक सदस्य
प्रोफेसर बी एच जाजू <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर कविता रंगनाथन <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  रजनीश दास <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  टी पी रामाराव <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  रेखा जैन <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  संजय वर्मा <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  वेंकट राव वी <Turn on JavaScript!

गौण सदस्य
प्रोफेसर  एस के बरुआ <Turn on JavaScript!>
प्रोफेसर  के वी रमानी <Turn on JavaScript!>