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कैफे

टान्सटाफल कैफे

टान्सटाफल एक 24 घंटे का ओपन एयर कैफे है, जिसके मेनु में एक साथ और पर्याप्त रूप से मैगी नूडल्स, समोसा, पकोडा, डोसा, सैंडविच, पिज्जा आदि शामिल हैं। रस, शीतल पेय, आइसक्रीम और चॉकलेट तक की पेशकश की होती है। शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन यहाँ उपलब्ध हैं ताकि छात्रों की ऊर्जा की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाए। परिसर भर में ले जाने की और वितरण करने की भी पेशकश है। 

1 जून, 2004 से शुरु हुए टान्सटाफल- कैफे- के इस फंकी नाम के पीछे एक रोचक कथा है :

रॉबर्ट हेनलेन के विज्ञान कथा उपन्यास ‘द मून’ एक हार्ष मिस्ट्रेस [1966], में चंद्रमा पृथ्वी की एक कॉलोनी में बदल जाता है। लूनीस याने चंद्रलोक के निवासी खुद को पृथ्वीवासियों द्वारा शोषित मानते थे। मैनुएल, जो कि एक कंप्यूटर इंजीनियर है और कहानी के नायक भी है, साथी चंद्रवासियों को कहता है कि जब तक वे कुछ बलिदान नहीं देंगे, वे स्वतंत्रता प्राप्त नहीं कर सकते। इस संदर्भ में, वे अपनी प्रसिद्ध लाइन कहते हैं, "यहाँ एक मुफ्त भोजन (TANSTAAFL) जैसी कोई चीज़ नहीं है।"

बाद में, नोबेल पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री मिल्टन फ्राइडमैन ने एक किताब [1975] इसी नाम से लिखी है, "यहाँ एक मुफ्त भोजन जैसी कोई चीज़ नहीं है"।

हर अवसर को बोध के रूप में बदलने की आई आई एम-ए की क्षमता की विचारोत्तेजकता से प्रेरित प्रोफेसर देवधर ने टान्सटाफल कैफे का नामकरण किया - छात्रों के लिए इसमें एक स्पष्ट चेतावनी है कि कैफ़े में 24 घंटे अर्थात बहुत इत्मीनान से समय बिताने की कीमत वर्ग में खराब परिणाम से भुगतनी पड़ेगी।

भोजन का राजा

नये परिसर वर्ग खंड भवन में स्थित फूड़ किंग आई आई एम-ए के पी जी पी छात्र श्री शरत बाबू द्वारा शुरू हुआ उपक्रम है। इस नवोदित उद्यमी ने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर भूखों को खिलाने के मिशन को पूरा करने का अपना जुनून परिपूर्ण किया है।

यहाँ भारतीय और चीनी भोजन, शाकाहारी और माँसाहारी दोनों परोसे जाते हैं।

समय - सुबह 10.00 से 2.00 बजे तक


कॉफ़ी एक्सप्रेस

कॉफी एक्सप्रेस आउटलेट में पसंदगी के कॉफी, चाय और अन्य पेय पदार्थ तथा शेक सेवा परिसर में उपलब्ध हैं। इस आउटलेट को भारत के एक अग्रणी कॉफी श्रृंखला कैफे कॉफी डे द्वारा चलाया जाता है। यहाँ सैंडविच, बर्गर, कुकीज, केक इत्यादि भी सीमित जलपान के रूप में उपलब्ध हैं।