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प्रयास – समुदाय सेवा पहल

"उन लाल ईंटों से परे क्या चलता रहता है ?"... पढ़ाई के इस मक्का के समान व लाल ईंटों के घेरे से बाहर अपने बचपन का अधिकांश समय व्यतीत करने वाले छोटे छोटे बच्चें आश्चर्य जैसा अनुभव करते हैं। कुछ सोचते हैं कि यह एक होटल है, तो कुछ सोचते हैं कि यह एक अस्पताल है, तो दूसरों को लगता है कि निश्चित रूप से यह स्कूल तो है ही नहीं......क्योंकि कभी किसी ने यहाँ से अपनी पीठ पर लटकाये बैग्स के साथ बच्चों को बाहर निकलते-भागते नहीं देखा.....!
इस सवाल का जवाब 2003 में प्रोफेसर अनिल गुप्ता द्वारा संचालित आई एस पी ई (भारतीय सामाजिक और राजनीतिक पर्यावरण) पाठ्यक्रम आवश्यकताओं के भाग के रूप में एक पी जी पी-1 छात्र- गीता और उसके अध्ययन समूह द्वारा की गयी परियोजना का विषय था।

पाठ्यक्रम परियोजना ने एक ऐसे प्रयास का रूप ले लिया, जिससे इन नन्हों के जीवन में अपने सपने को जीने के लिए एक दिन के लिए आशा व समर्थन का संचार करें और अगले दिन  सीखने के लिए  चले जायें। इससे  अधिक महत्वपूर्ण और मजेदार बात यह है कि उन्हें ऐसा बचपन मिलता है, जो उन्हें एक बेहतर भविष्य पाने का मौका देगा।

आई आई एम अहमदाबाद के साफ सुथरे नए परिसर के रूप में जो आज खड़ा है वहाँ एक समय झोंपड़ियों वाला पड़ोस था और काफी असमानता रहती थी, जिससे उस इलाके के बच्चों का भविष्य उनके वर्तमान में बेहतर नहीं होता।

लेकिन सौभाग्य से इन बच्चों के लिए यह परियोजना सिर्फ एक रिपोर्ट पर आकर बंद नहीं हुई, जो कि किसी कोने में धूल खाते रहती, लेकिन इससे प्रतिभागियों में एक ऐसी उत्तेजना बढ़ी कि उनको लगने लगा कि उनको इन बच्चों के लिए कुछ सार्थक करना चाहिए। जिस जगह पर बच्चों के लिए कक्षाएँ आयोजित की जा सके ऐसी जगह खोजकर रामकृष्ण फाउन्डेशन के साथ एक स्वास्थ्य शिविर खोला गया। अंधजन मंडल स्कूल के सामने एक मंदिर के परिसर को ही खुद मंदिर के पुजारी ने दान के रूप में प्रदान किया।
 यह यात्रा इस तरह शुरू हुई, जो आज के दिन तक जारी है। कुछ प्रेरणादायक उपाख्यानों के  इस उद्यम की कहानी को प्रयास कहा जाता है। एक बार प्रोफेसर अनिल कुमार गुप्ता के एक वर्ग में प्रयास के बच्चों को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। वर्ग में उपयोग में आ चुकी दियासलाई का किसी भी तरह प्रयोग करने के लिए कहा गया था।  बच्चों ने कुछ चालीस प्रकार से दियासलाई का उपयोग करके पतंग बनाया, सिंदूर लगाने की चीज़ बनाई, मज़बूत नाखून के साथ पैटिंग के रूप में कुछ अजीबोगरीब चीज़ें बनाईं। प्रोफेसर गुप्ता को आश्चर्य हुआ कि, "ये बच्चे कभी इन लाल ईंटों के इस कक्ष में आकर  ऐसी चीज़ें बनाने में इतने सक्षम होंगे ?" 
एक प्रसंग पर एक पी जी पी-1 छात्र,  इन बच्चों को शर्मनाक समस्या का सामना करने के बारे में पढ़ा रहा था, तब वह एक बच्चे को लाख कोशिशों के बावजूद 6 लिखने के लिए मदद नहीं कर पाया। दो- तीन महीनों में अनपेक्षित रूप से दूसरे एक बच्चे ने इस बच्चे को मदद करने की अनुमति के लिए पूछा। और – अगले ही क्षण में बच्चा 6 लिखने में सक्षम हो गया। इस घटना की एक छोटी सी में गहराई का तथ्य यह है कि कुछ लोगों के दिमाग घड़ी के सीधे घुमाव की तरह होते हैं, तो कुछ लघुमति लोगों के दिमाग घड़ी के विपरीत घुमाव की तरह होते हैं। इस तरह कुछ कम संख्या में ऐसे लोग होते है, जो 6 जैसे अंक को घड़ी के घुमाव की तरह लिखना पसंद करते हैं।  इन बच्चों की बुद्धिमत्ता की कहानियाँ सैकड़ों पृष्ठों तक चला सकते हैं।

अपनी यात्रा के सात साल के साथ में, प्रयास ने कई ऐसे बच्चों के जीवन को छुआ है। इन बच्चों के लिए अवसरों की एक पूरी नई दुनिया प्रयास ने खोल दी है। इन बच्चों की आंखों में रोशनी चमक उठती है, जब वे 'वेक अप सिड' और 'तारे जमीं पर' जैसे गानों पर नृत्य करते हैं। उनकी खुशियों की कोई सीमा नहीं होती है, जब वे दिवाली, रक्षाबंधन, स्वतंत्रता दिवस और कई ऐसे त्योहारों का जश्न मनाते हैं।  वे अब एक समान खेल,  मातृभाषा माध्यम के स्कूल में जाते हैं और औपचारिक शिक्षा की अपनी राह पर चलते हैं, जो उन्हें सिर्फ एक निशान बनने के बजाय हमारे इस लोकतंत्र का एक भाग बनने में सक्षम बनाएंगे। 

 

प्रोफेसर गुप्ता के शब्दों में - "प्रयास मेरे लिए एक सफलता है, भले ही इसने सकारात्मक रूप से एक ही बच्चे के जीवन को छुआ हो, क्योंकि यह स्पर्श पीढ़ियों तक चलेगा। उससे इन परिवारों को उनके बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक एक बल मिलने में मदद मिलेगी।” इस संस्थान के सम्मानित अस्तित्व के स्वर्ण जयंती वर्ष में, हम सही मायने में इस स्वर्ण उद्यम- 'प्रयास' नामक प्रयास की सफलता का जश्न मनाएंगे। प्रयास बड़ा प्रभाव बनाने के लिए और एक बड़ा आंदोलन बनाने के लिए भविष्य की तरफ नज़र रखे हुए है। प्रोफेसर अंकुर सरीन के अनुसार, "आई आई एम - ए  के छात्र समुदाय के लिए प्रयास प्रारंभिक प्रबंधन सीखने का एक अवसर प्रदान करता है, जो समाज के लाभ में है। इस छात्र समुदाय के लिए प्रयास प्रबंधन के उनके दृष्टिकोण को विस्तृत करने में सहायक बन सकता है और साथ साथ यहाँ उनकी भागीदारी से इसके दायरे को बढ़ाने में और अधिक सामाजिक हित बनाने में मदद मिल सकती है। प्रयास एक ऐसा छोटा सा पौधा है, जिसे आगे बढ़ने की ख्वाहिश है और उसकी उचित देखभाल करके ध्यान दिया जाता है। यह पौधा जल्द ही एक बारहमासी फल देने वाले पेड़ का रूप ले सकता है। इसकी  गतिविधियों का समर्थन करने के लिए प्रयास समाज से योगदान मिलने की दिशा में देख  रहा है।

 
प्रयास तक पहुँचने के लिए टर्न ओन जावास्क्रिप्ट पर ई - मेल किया जा सकता है।