Logo text

होम » संस्थान » आईआईएम-ए के बारे में » प्रमुख तथ्य

आई आई एम-ए का इतिहास

आई आई एम-ए सिर्फ चार दशकों में देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में से एक उल्लेखनीय अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन स्कूल के रूप में विकसित हुआ  है।

यह सब डॉ. विक्रम साराभाई और कुछ अन्य उत्साही उद्योगपतियों के द्वारा शुरू हुआ, जिन्होंने एहसास किया कि विकासशील समाज के लिए कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन,जनसंख्या नियंत्रण,ऊर्जा और सार्वजनिक प्रशासन महत्वपूर्ण आधार हैं, और इन उद्योगों का कुशलता पूर्वक प्रबंधन करना जरूरी है।
 

"परिणामस्वरूप भारत सरकार ,गुजरात सरकार और औद्योगिक क्षेत्रों  के सक्रिय सहयोग से एक स्वायत्त निकाय के रूप में 1961 में भारतीय प्रबंधन संस्थान,अहमदाबाद का निर्माण किया गया।"
यह स्पष्ट था कि इसके लिए केवल दृष्टि ही पर्याप्त नहीं थी। प्रभावी प्रशासन और शिक्षा  की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में देखा गया था।
प्रारंभ से ही संस्थापकों ने संकाय शासन की अवधारणा शुरू की: संकाय के सभी सदस्य संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक गतिविधियों का प्रबंध करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आई आई एम-ए में सीखने के अनुभव की उच्च गुणवत्ता के पीछे संकाय का सशक्तिकरण प्रेरक बल रहा है।

संस्थान ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के साथ प्रारंभिक सहयोग किया था। इस सहयोग ने संस्थान के शिक्षा के दृष्टिकोण को काफी प्रभावित किया है। धीरे-धीरे, इससे यह पूर्वी और पश्चिमी मूल्यों के सर्वोत्तम संगम के रूप में उभरा है।